<p>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ईडी छापेमारी में हस्तक्षेप के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि ये एक असाधारण स्थिति है और जब कोई मुख्यमंत्री केंद्रीय एजेंसी की जांच में दखल देता है. तो इसे सिर्फ केंद्र और राज्य के बीच का विवाद नहीं माना जा सकता. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ममता बनर्जी और राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. एजेंसी का आरोप है कि आईपीएसी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली. जबकि राज्य पुलिस ने ईडी अधिकारियों पर ही एफआईआर दर्ज कर दी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि छापेमारी के दौरान मिली आपत्तिजनक सामग्री मुख्यमंत्री अपने साथ ले गईं. इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या कोई मुख्यमंत्री जांच में हस्तक्षेप कर लोकतंत्र को खतरे में डाल सकता है. राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि ये मामला केंद्र बनाम राज्य का है और इसे अनुच्छेद 131 के तहत सुना जाना चाहिए. वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ईडी को मौलिक अधिकारों के आधार पर याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है. प्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये सामान्य मामला नहीं है और परिस्थितियां असाधारण हैं. मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी. </p>
