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swm news: नीमली खुर्द में पेयजल टंकी बनी शोपीस: महिलाएं दूर-दूराज से मटके ढोने को मजबूर

2026-05-04 20 Dailymotion

सरकारी दावों की कलई खुली, गांव में बूंद‑बूंद को तरसते लोग<br /><br />सवाईमाधोपुर. भीषण गर्मी के इस दौर में जब सरकार और प्रशासन पानी की उपलब्धता को लेकर बड़े‑बड़े दावे कर रहे हैं, उसी समय जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर दूर बसे नीमली खुर्द गांव में लोग प्यासे मरने को मजबूर हैं। यहां हालात इतने गंभीर हैं कि महिलाएं आज भी सिर पर मटके रखकर दो‑तीन किलोमीटर दूर खेतों और निजी बोरिंग से पानी लाने को विवश हैं। जल जीवन मिशन और हर घर जल योजना के तहत बनाई गई टंकी और ट्यूबवेल उद्घाटन के बाद ही बंद हो गए और तब से लेकर अब तक किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने उनकी सुध नहीं ली।<br /><br />गांव के लोग बताते हैं कि सरकारी जलस्रोत पूरी तरह खराब पड़े हैं, पशु पानी के लिए तड़प रहे हैं और आगजनी जैसी स्थिति में बुझाने का कोई साधन तक नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के सात दशक बाद भी उनका गांव पानी की बूंद‑बूंद के लिए तरस रहा है, जिससे सरकार और प्रशासन के दावों की पोल खुल रही है।<br />अधूरी योजनाएं, बंद पड़ी टंकी<br />वार्ड पार्षद कमलेश योगी ने बताया कि चार‑पांच साल से गांव में पानी की समस्या बनी हुई है। दो साल पहले जल जीवन मिशन और हर घर जल योजना के तहत टंकी और ट्यूबवेल बनाए गए थे। उद्घाटन के बाद विभागीय कर्मचारी लौट गए, लेकिन उसके बाद किसी ने यह नहीं देखा कि टंकी और बोरिंग की हालत क्या है। मुश्किल से एक महीने तक पानी आया और फिर सब बंद हो गया।<br /><br />ग्रामीणों की पीड़ा नहीं सुन रहे अधिकारी<br /><br />ग्रामीण उमाशंकर गुर्जर ने कहा “देश को आजाद हुए सत्तर बरस हो गए, लेकिन नीमली गांव की महिलाएं आज भी सिर पर मटके रखकर दूर से पानी लाती हैं। सरकारी जलस्रोत पूरी तरह खराब पड़े हैं। यहां तक कि श्मशान घाट से भी कभी‑कभी पानी लाना पड़ता है।” इसी प्रकार महिला ममता ने बताया कि गांव में पीने के पानी का कोई स्थायी इंतजाम नहीं है। “हम अपने परिवार और पशुओं के लिए दूर खेतों से पानी लाते हैं। अगर गांव में आग लग जाए तो बुझाने का कोई उपाय नहीं है। पानी की समस्या से जनजीवन पूरी तरह अस्त‑व्यस्त है।”<br />कई बार की शिकायत, पर नहीं हुआ समाधान<br />ग्रामीणों ने बताया कि विधायक और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। गांव की महिलाएं रोजाना भीषण गर्मी में पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं। पशु पानी के लिए तड़प रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों का जीवन संकट में है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के सात दशक बाद भी उनका गांव पानी की बूंद‑बूंद के लिए तरस रहा है।<br /><br />इनका कहना है...<br /><br />नीमली खुर्द गांव में पेयजल टंकी की मोटर जलने से आपूर्ति प्रभावित है। मोटर को निकलवाकर ठीक करवाने भेजा है। जल्द ही आपूर्ति सुचारू हो जाएगी।<br />हरकेश मीणा, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, खण्डार<br /><br />

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