Ahmedabad : कच्छ जिले के श्रमिक परिवार की नवजात बच्ची, जो बायलेट्रल कोएनल एट्रेसिया जैसी अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा जन्मजात खामी के साथ पैदा हुई थी, उसे सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों की टीम ने सफल ऑपरेशन के बाद नया जीवन दिया है। दरअसल इस नवजात के नाक के छिद्र पीछे के भाग से बंद थे जिन्हें ऑपरेशन के जरिए खोला गया है। आंकड़ों के आधार पर देखें तो लगभग पांच से आठ हजार बच्चों में से किसी एक बच्चे को यह खामी हो सकती है। सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि बच्ची का जन्म 1 मई 2026 को कच्छ जिले के नलिया में हुआ था। जन्म के तुरंत बाद सांस न ले पाने पर उसे भुज और फिर अहमदाबाद रेफर किया गया। जांच में पता चला कि बच्ची के दोनों नाक के छिद्र पीछे से पूरी तरह बंद हैं। 12 मई को एंडोस्कोपिक ट्रांसनेजल कोएनोप्लास्टी सर्जरी की गई, जिसमें नाक का बंद मार्ग खोलकर सांस लेने का रास्ता बनाया गया।
