<p>गुजरात के नवसारी निवासी 62 वर्षीय बोमी जागीरदार विश्व साइकिल दिवस पर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं. वे पिछले 48 वर्षों से बिना किसी रुकावट के रोजाना साइकिल चला रहे हैं. 14 साल की उम्र में शुरू हुआ उनका साइकिलिंग सफर आज भी उसी जुनून के साथ जारी है. बोमी ने दिल्ली-मुंबई, कश्मीर-कन्याकुमारी, मनाली-लेह और नेपाल जैसी लंबी एवं चुनौतीपूर्ण यात्राएं साइकिल से पूरी की हैं. उनकी फिटनेस और संतुलन इतना शानदार है कि साथी साइकिलिस्ट उन्हें साइकिलिंग का ‘भीष्म पितामह’ कहते हैं. उन्होंने कई युवाओं को इस खेल से जोड़ा और प्रेरित किया. आज भी वे हर सुबह करीब 50 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं. अब उनका अगला सपना नवसारी से भूटान और थाईलैंड तक साइकिल यात्रा करने का है.</p>
