<p>अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से कच्चे तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और उसका अधिकांश तेल इसी समुद्री मार्ग से आता है. ऐसे में तेल कीमतों में नरमी आने से आयात बिल घट सकता है, महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और रुपये को मजबूती मिल सकती है. साथ ही शिपिंग और बीमा लागत घटने से व्यापारिक गतिविधियों को भी राहत मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता लंबे समय तक कायम रहता है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आम लोगों की जेब पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है.</p>
