<p>दिल्ली में सरकार बदल गई, टैंकरों की रूपरेखा बदल गई, लेकिन दिल्ली के कई निवासियों के लिए पानी की जद्दोजहद खत्म नहीं हुई. मेहरौली इलाके की कुसुमपुर पहाड़ी में, पानी की एक-एक बूंद के लिए लोगों को हर रोज संघर्ष करना पड़ता है. दिल्ली जल बोर्ड के टैंकरों के आने के पहले ही सड़कों पर बर्तनों की कतारें लग जाती हैं। टैंकर आते हैं तो लोग अपने रोजमर्रे का काम छोड़ देते हैं और पानी भरने के लिए दौड़ पड़ते हैं.</p><p>लोगों की शिकायत है कि पाइप से नियमित पानी की सप्लाई सिर्फ वादा थी. टैंकरों के आने का समय भी तय नहीं. अक्सर देरी की वजह से लोगों को देर तक इंतजार करना पड़ता है. भीड़ जमा हो जाती है और आपस में झगड़े भी होते हैं.</p><p>इलाके की आबादी 30,000 से ज्यादा है। इसे देखते हुए पानी के बोरवेल बेहद कम हैं. लिहाजा लोग टैंकर सप्लाई पर ही निर्भर हैं. कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि पानी के सरकारी स्रोत भी कमर्शियल हो गए हैं. बोरवेल का पानी इस्तेमाल करने के लिए उनसे पैसे मांगे जाते हैं.</p>
