<br />निजी अस्पतालों में सुरक्षा की कब्रगाह, मरीजों की जान पर संकट<br />मॉल और पार्किंग स्टैंड मौत के जाल, नियमों की खुली अनदेखी<br /><br />सवाईमाधोपुर. लखनऊ के अलीगंज कोचिंग हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन सवाईमाधोपुर में हालात उतने ही खतरनाक हैं। जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में संचालित कोचिंग संस्थान, निजी शिक्षण संस्थाएं, अस्पताल, मॉल और पार्किंग स्टैंड सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते नज़र आ रहे हैं। अग्निशमन उपकरणों की अनुपलब्धता, आपातकालीन निकास मार्गों की कमी और नियमों की अनदेखी ने इन जगहों को संभावित मौत के जाल में बदल दिया है। लेकिन जिम्मेदारों को कोई खबर नहीं है।<br /><br />कोचिंग संस्थानों में खतरे की घंटी<br /><br />शहर में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर संचालित हैं। लेकिन अधिकांश में आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो संसाधन हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। कई भवनों में निकास मार्ग तक अवरुद्ध हैं, जिससे हादसे की स्थिति में छात्रों की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।<br />निजी अस्पतालों की लापरवाही<br />अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, लेकिन यहां भी अग्निशमन उपकरण और सुरक्षित निकासी मार्ग नदारद हैं। कई निजी अस्पतालों में आग बुझाने के सिलेंडर तक खाली पड़े रहते हैं और स्टाफ को आपातकालीन प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।<br /><br />मॉल और पार्किंग स्टैंडों में खतरा<br /><br />भीड़भाड़ वाले मॉल और पार्किंग स्टैंडों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी आम है। वाहनों की भीड़, अव्यवस्थित पार्किंग और आग बुझाने के उपकरणों की कमी ने इन स्थानों को हादसे की आशंका से भर दिया है। आग या दुर्घटना की स्थिति में यहां भारी जान‑माल का नुकसान हो सकता है। शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन हर बार हादसे के बाद ही जागता है। सवाल यही है कि क्या सवाईमाधोपुर को भी किसी बड़े हादसे का इंतजार है। जब तक निरीक्षण और कार्रवाई नहीं होगी, तब तक खतरा टला नहीं माना जा सकता।<br />निरीक्षण में होती है खानापूर्ति<br />नगरपरिषद अग्निशमन विभाग की ओर से बड़े-बड़े कोचिंग संस्थानों, निजी अस्पतालों में निरीक्षण के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। कोचिंग संस्थानों, अस्पतालों, मॉल और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष अभियान चलाकर नियमित निरीक्षण होना जरूरी हो गया है।<br />
