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असम के बांस शिल्प को मिला GI टैग, कारीगरों को उम्मीद- उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

2026-06-24 12 Dailymotion

<p>पीढ़ियों से, बांस को हाथ से आकार देने की लयबद्ध आवाज पूरे असम के गांवों में गूंजती रही है. कुशल कारीगरों ने इस घास को सुंदर, व्यावहारिक और अलग-अलग तरह के पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों में बदल दिया है. अब, इस सदियों पुरानी परंपरा को व्यापक मान्यता मिल रही है. असम की समृद्ध विरासत को एक बड़ा बढ़ावा देते हुए, बाह सिल्पा के नाम से जाने जाने वाले राज्य के स्वदेशी बांस शिल्प को प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेत यानी जीआई टैग दिया गया है. कारीगरों का कहना है कि जीआई टैग उद्योग को बढ़ावा देगा, बाजार के अवसरों का विस्तार करेगा और पारंपरिक शिल्प कौशल को संरक्षित करेगा.  </p><p>15 जून को 'बाह सिल्पा', पारंपरिक वाद्ययंत्र 'बिहू पेपा' और कार्बी आंगलोंग और देओरी हैंडलूम उत्पादों को भी जीआई टैग मिला है. इससे राज्य की सांस्कृतिक और कारीगरी से जुड़ी समृद्ध विरासत और परंपरा उजागर हुई.</p>

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