रोजर डब्ल्यू. बैबसन की समझदारी भरी और दूर की सोचने वाली किताब, 'मेकिंग गुड इन बिज़नेस इन हिंदी' (अनुवादित, सचित्र, बेहतर और एडिटेड), एक हमेशा चलने वाली किताब है जो बिज़नेस, कैरेक्टर और मौके की सच्ची समझ देती है। बिज़नेस में सफलता सिर्फ़ पैसे कमाने की स्ट्रेटेजी ही नहीं देती; यह बिज़नेस में सफलता की सोच, नैतिक बिज़नेस सिद्धांतों और लंबे समय तक पैसा बनाने पर एक संतुलित नज़रिया देती है, जो आज की कॉम्पिटिटिव बिज़नेस दुनिया में भी उतने ही ज़रूरी हैं। यह किताब यह साफ़ करती है कि बिज़नेस में कौन सफल होता है, इसका जवाब टैलेंट या किस्मत में नहीं, बल्कि सही सोच, दिशा और लगातार कोशिश में है। बैबसन हर फ़ील्ड में मौजूद मौकों पर रोशनी डालते हैं और बताते हैं कि कोई भी बिज़नेस के लिए करियर गाइडेंस देकर और मौजूदा सिस्टम को समझकर अपनी पहचान बना सकता है। बिज़नेस में सफलता की उनकी परिभाषा कैरेक्टर, सर्विस और सस्टेनेबिलिटी पर आधारित है। सफलता में आने वाली रुकावटों पर चैप्टर आत्मविश्वास की कमी, नाकामी का डर और इकोनॉमिक सिस्टम को दोष देने जैसी मानसिक रुकावटों को तोड़ते हैं। यह किताब पढ़ने वालों को फेलियर के डर और कॉन्फिडेंस की कमी से ऊपर उठने और मौके की सोच बनाने के लिए प्रेरित करती है, जिससे वे अपनी असली काबिलियत पहचान सकें।
